इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ ‘अर्थशास्त्र’ के पहले भाग का पहला खंड है। ‘अर्थशास्त्र’ केवल अर्थशास्त्र पर नहीं, बल्कि राजनीति, शासन कला, कानून, सैन्य रणनीति और विदेश नीति पर एक व्यापक ग्रंथ है। यह एक सफल राज्य के संचालन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करता है। यह प्रारंभिक खंड संभवतः राजा के कर्तव्यों, मंत्रियों की नियुक्ति, और एक कुशल प्रशासनिक तंत्र की स्थापना जैसे मूलभूत विषयों पर केंद्रित होगा। यह प्राचीन भारतीय राजनैतिक चिंतन को समझने के लिए एक अद्वितीय और महत्त्वपूर्ण स्रोत है।
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