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प्रमेय कमल मार्तण्ड तृतोय भाग - Pramey Kamal Martand part-3 - Book
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प्रमेय कमल मार्तण्ड तृतोय भाग – Pramey Kamal Martand part-3 – Book

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पुस्तक सार

प्रमेयकमलमार्तण्ड’ जैन न्यायशास्त्र का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और विस्तृत ग्रंथ है, जिसकी रचना प्रभाचंद्र ने ग्यारहवीं शताब्दी में की थी। यह माणिक्यनंदि के ‘परीक्षामुखसूत्र’ पर एक विस्तृत टीका है। ‘प्रमेय’ (ज्ञान के विषय) रूपी कमलों को खिलाने के लिए ‘मार्तण्ड’ (सूर्य) के समान होने के कारण इसका यह नाम पड़ा। यह ग्रंथ जैन दर्शन के प्रमाणमीमांसा (epistemology) और तर्कशास्त्र का एक विश्वकोश है, जिसमें अन्य भारतीय दर्शनों के मतों का विस्तृत खंडन करते हुए जैन सिद्धांतों को स्थापित किया गया है। यह इसका तीसरा भाग है।

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