इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“दर्शन-दिग्दर्शन” भारतीय और पाश्चात्य दर्शन की विभिन्न विचारधाराओं का एक व्यापक और तुलनात्मक परिचय प्रस्तुत करने वाली एक महत्वपूर्ण कृति है। इस पुस्तक में लेखक ने दर्शनशास्त्र के जटिल विषयों को सरल और सुबोध भाषा में प्रस्तुत किया है, जिससे यह विषय के नए छात्रों और सामान्य पाठकों के लिए भी सुलभ हो जाता है। इसमें भारतीय दर्शन की प्रमुख धाराओं जैसे- न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, और वेदांत के साथ-साथ प्रमुख पाश्चात्य दार्शनिकों के विचारों का भी विश्लेषण किया गया है। यह कृति विभिन्न दार्शनिक सिद्धांतों का केवल परिचय ही नहीं देती, बल्कि उनके बीच के संबंधों और अंतरों को भी स्पष्ट करती है, जिससे पाठक को दर्शनशास्त्र की एक समग्र और वैश्विक समझ प्राप्त होती है।
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