इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक 18वीं शताब्दी के दौरान भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की स्थिति पर एक ऐतिहासिक अध्ययन प्रस्तुत करती है। यह उस आम धारणा को चुनौती दे सकती है कि औपनिवेशिक काल से पहले भारत में वैज्ञानिक प्रगति रुक गई थी। इस कृति में उस दौर में खगोल विज्ञान, गणित, चिकित्सा (आयुर्वेद और यूनानी), धातु विज्ञान, और वस्त्र प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में हुए विकास और नवाचारों का दस्तावेजीकरण किया गया होगा। लेखक ने विभिन्न स्रोतों, जैसे- पांडुलिपियों, शाही रिकॉर्डों और पुरातात्विक साक्ष्यों, के आधार पर यह दर्शाने का प्रयास किया होगा कि यूरोपीय प्रभाव से पहले भी भारत में एक जीवंत वैज्ञानिक और तकनीकी परंपरा मौजूद थी।
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