इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“श्री शुक्रनीति” या “शुक्रनीतिसार” प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो राजनीति, प्रशासन और सामाजिक आचार-संहिता पर केंद्रित है। इसे शुक्राचार्य द्वारा रचित माना जाता है। इस कृति में एक आदर्श राज्य की संरचना, राजा के कर्तव्य, मंत्रियों की योग्यता, न्याय-प्रणाली, कर-व्यवस्था और युद्ध-नीति जैसे विषयों का विस्तृत वर्णन है। यह केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि सामाजिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर भी व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। यह संस्करण मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ उनका प्राकृत भाषा में समानार्थक श्लोक भी प्रस्तुत करता है, जो इसे भाषा और नीतिशास्त्र दोनों के अध्येताओं के लिए विशेष रूप से मूल्यवान बनाता है।
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