इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“स्मृति चन्द्रिका” मध्यकालीन भारत में रचित धर्मशास्त्र का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है। प्रस्तुत पुस्तक इस ग्रंथ का ‘आशौच-काण्ड’ नामक विशिष्ट खंड है। ‘आशौच’ का तात्पर्य उस अशुद्धता की अवधि से है जो परिवार में किसी के जन्म या मृत्यु के अवसर पर मानी जाती है। इस खंड में जन्म और मृत्यु से संबंधित विभिन्न प्रकार के सूतकों और उनसे जुड़े नियमों की विस्तृत विवेचना की गई है। इसमें यह बताया गया है कि यह अशुद्धि कितने समय तक रहती है, इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं, और शुद्धि की प्रक्रिया क्या है। यह हिंदू सामाजिक और धार्मिक परंपराओं के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
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