इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह शीर्षक महर्षि जैमिनि द्वारा रचित ‘मीमांसा दर्शन’ नामक ग्रंथ को संदर्भित करता है। मीमांसा, भारतीय दर्शन के छह आस्तिक दर्शनों में से एक है, जिसका मुख्य उद्देश्य वेदों के कर्मकांडीय भाग की व्याख्या करना और यज्ञों की विधि तथा उनके फलों को स्थापित करना है। यह दर्शन शब्द की शक्ति, वेदों की अपौरुषेयता (किसी पुरुष द्वारा रचित न होना) और धर्म के स्रोत के रूप में वेद की सर्वोच्चता पर जोर देता है। यह ग्रंथ गहन दार्शनिक और तार्किक विश्लेषणों से भरा है, जो वैदिक अनुष्ठानों के पीछे के तर्क और उद्देश्य को समझने का प्रयास करता है। यह भारतीय दर्शन और वैदिक साहित्य के गंभीर अध्येताओं के लिए एक मौलिक कृति है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।