इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक क्लासिक बोध-कथा है जो मनुष्य की चालाकी और प्रकृति के बीच के संघर्ष को दर्शाती है। कहानी में, एक ‘आदमी’ (अक्सर एक किसान) अपनी मुर्गियों को एक चालाक ‘लोमड़ी’ से बचाने की कोशिश करता है। इसमें दोनों के बीच बुद्धि और धूर्तता का एक मजेदार खेल चलता है – आदमी जाल बिछाता है, और लोमड़ी हर बार किसी नई तरकीब से बच निकलती है या उसे मात दे देती है। कहानी का अंत अलग-अलग हो सकता है, लेकिन यह अक्सर यह संदेश देती है कि प्रकृति की सहज बुद्धि को कम नहीं आंकना चाहिए, या यह कि चालाकी हमेशा काम नहीं आती।
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