इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
उग्रसेन जैन द्वारा प्रस्तुत यह कृति ‘आप्त स्वरूप’ नामक किसी मूल ग्रंथ की हिंदी भाषा में टीका या व्याख्या है। ‘आप्त’ का अर्थ है प्रामाणिक या विश्वसनीय पुरुष, जो जैन धर्म में तीर्थंकरों के लिए प्रयुक्त होता है। मूल ग्रंथ में संभवतः एक सच्चे देव (‘आप्त’) के स्वरूप, उनके गुणों और उन्हें पहचानने के लक्षणों का वर्णन होगा। यह ‘भाषा टीका’ उस मूल ग्रंथ के दार्शनिक और गूढ़ अर्थ को सरल हिंदी में स्पष्ट करती है, जिससे पाठक आसानी से समझ सकें कि जैन दर्शन के अनुसार एक सच्चे ईश्वर का स्वरूप क्या होना चाहिए।
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