इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
अद्वैतसिद्धि’ मधुसूदन सरस्वती द्वारा सोलहवीं शताब्दी में रचित अद्वैत वेदांत का एक युगांतरकारी और अत्यंत गहन ‘प्रकरण ग्रंथ’ है। यह कृति व्यासतीर्थ जैसे द्वैतवादी दार्शनिकों द्वारा अद्वैत वेदांत पर लगाए गए आरोपों का तर्कपूर्ण खंडन करने और अद्वैत के सिद्धांत (ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है) को अकाट्य रूप से स्थापित करने के लिए लिखी गई थी। अपनी जटिल न्याय-शैली और सूक्ष्म तर्कों के लिए प्रसिद्ध, यह अद्वैत वेदांत के उन्नत अध्ययन में एक शिखर ग्रंथ माना जाता है। यह इस महान कृति का प्रथम भाग है।
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