इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक ‘आर्यों के मूल निवास स्थान’ के विवादास्पद विषय पर एक विशिष्ट सिद्धांत प्रस्तुत करती है। लेखक इस कृति में विभिन्न पुरातात्विक, भाषाई, साहित्यिक (विशेषकर वैदिक) और भौगोलिक साक्ष्यों के आधार पर यह तर्क देते हैं कि आर्यों का मूल निवास स्थान कहीं बाहर नहीं, बल्कि भारत के मध्य हिमालयी क्षेत्र में था। यह कृति प्रचलित ‘आर्यन आक्रमण सिद्धांत’ का खंडन करती है और भारत में ही आर्य संस्कृति के स्वदेशी विकास का एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है। यह भारतीय इतिहास-लेखन में एक महत्त्वपूर्ण बहस का हिस्सा है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।