इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘आत्मतत्व-विचार’ नामक आध्यात्मिक चिंतन श्रृंखला का तीसरा भाग है। यह श्रृंखला ‘आत्म-तत्व’ यानी ‘मैं कौन हूँ’ इस मौलिक प्रश्न पर केंद्रित है। इस तीसरे भाग में वेदांत और जैन दर्शन जैसे भारतीय दर्शनों के आधार पर आत्मा के स्वरूप, उसके बंधनों और मोक्ष के मार्ग पर और अधिक गहराई से विचार किया गया है। यह उन साधकों के लिए है जो आत्म-निरीक्षण और स्वाध्याय के माध्यम से अपने वास्तविक स्वरूप को जानने की यात्रा पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
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