इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 10वीं सदी के महान नैयायिक (तर्कशास्त्री) उदयनाचार्य द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण दार्शनिक ग्रंथ है। ‘आत्म-तत्व-विवेक’ का अर्थ है ‘आत्मा के तत्व पर विवेकपूर्ण विचार’। इस कृति में उदयनाचार्य ने बौद्धों के ‘अनात्मवाद’ (आत्मा का अभाव) के सिद्धांत का तार्किक रूप से खंडन किया है और विभिन्न प्रमाणों के आधार पर एक स्थायी और नित्य ‘आत्मा’ के अस्तित्व को सिद्ध किया है। यह न्याय-वैशेषिक दर्शन का एक शिखर ग्रंथ है।
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