इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“बार्हस्पत्य अर्थशास्त्र” या “बृहस्पति सूत्र” प्राचीन भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र पर एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे देवगुरु बृहस्पति द्वारा रचित माना जाता है। यद्यपि इसका मूल रूप कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ जितना सुव्यवस्थित उपलब्ध नहीं है, फिर भी इसके सूत्र विभिन्न ग्रंथों में उद्धृत मिलते हैं। यह ग्रंथ कौटिल्य की परंपरा से कुछ भिन्न, भौतिकवादी और यथार्थवादी राजनीतिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। इसमें राजा के कर्तव्यों, दंड-नीति, और राज्य के संचालन के व्यावहारिक पहलुओं पर अधिक जोर दिया गया है। यह प्राचीन भारतीय राजनीतिक चिंतन की विविधता और समृद्धि को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो केवल कौटिल्य तक ही सीमित नहीं थी।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।