इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“बौद्ध-धर्म के १५०० वर्ष” शीर्षक वाली यह पुस्तक बौद्ध धर्म के इतिहास के एक लंबे कालखंड का विश्लेषण प्रस्तुत करती है। यह कृति संभवतः बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद से लेकर लगभग 10वीं-11वीं शताब्दी तक बौद्ध धर्म के विकास, विस्तार और परिवर्तनों का एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण है। इसमें विभिन्न बौद्ध संगीतियों, हीनयान और महायान जैसी प्रमुख शाखाओं का उदय, नागार्जुन जैसे महान दार्शनिकों का योगदान, भारत के विभिन्न हिस्सों और एशिया के अन्य देशों में बौद्ध धर्म का प्रसार, और अंततः भारत में इसके पतन के कारणों की विस्तृत विवेचना की गई होगी। यह बौद्ध धर्म के ऐतिहासिक विकास को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण अकादमिक ग्रंथ है।
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