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भास्कराभास निवारण - Bhaskrabhas Nivaran - Book
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भास्कराभास निवारण – Bhaskrabhas Nivaran – Book

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पुस्तक विवरण

यह एक दार्शनिक या शास्त्रीय खंडन-मंडन ग्रंथ प्रतीत होता है। ‘भास्कराभास’ का अर्थ है भास्कर (संभवतः दार्शनिक भास्कराचार्य) के मत में प्रतीत होने वाले दोष या भ्रम। यह पुस्तक उन दार्शनिक तर्कों का ‘निवारण’ यानी खंडन करती है जो लेखक के अनुसार भ्रामक हैं। यह किसी विशिष्ट वेदांत संप्रदाय, संभवतः अद्वैत वेदांत, के दृष्टिकोण से भेदाभेदवाद जैसे सिद्धांतों की आलोचना हो सकती है। यह दर्शनशास्त्र के गंभीर और उन्नत अध्येताओं के लिए एक तकनीकी और गहन कृति है।

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