इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक आचार्य विनोबा भावे के ऐतिहासिक भूदान आंदोलन का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ है, जो इस श्रृंखला का पांचवां खंड है। ‘भूदान-गंगा’ शीर्षक इस आंदोलन की तुलना पवित्र गंगा नदी से करता है, जो पूरे देश में बहकर सामाजिक विषमता को दूर करने का प्रयास कर रही थी। इस खंड में विनोबा जी की पदयात्रा के किसी विशेष चरण, उनके प्रवचनों, और भूमिहीनों को भूमि दान में मिलने की प्रेरणादायक कहानियों का संकलन किया गया है। यह गांधीवादी विचारधारा के व्यावहारिक प्रयोग का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है और अहिंसक सामाजिक परिवर्तन की शक्ति में विश्वास जगाती है।
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