इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक बौद्ध धर्म का एक आलोचनात्मक और तार्किक (‘बुद्धिवादी’) अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें लेखक ने बौद्ध धर्म को केवल आस्था और श्रद्धा के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि तर्क, मनोविज्ञान और आधुनिक चिंतन की कसौटी पर परखा होगा। पुस्तक में बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों, जैसे- अनित्यता, अनात्मवाद, और प्रतीत्यसमुत्पाद, की वैज्ञानिक और दार्शनिक प्रासंगिकता का विश्लेषण किया गया हो सकता है। इसका उद्देश्य यह दिखाना है कि बौद्ध धर्म चमत्कारों और अलौकिक शक्तियों पर आधारित होने के बजाय, एक गहन मनोवैज्ञानिक और अनुभवजन्य दर्शन है जो मानव-दुःख के कारणों और उसके निवारण का एक व्यावहारिक मार्ग प्रस्तुत करता है।
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