इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह ग्रंथ वेदांत दर्शन के foundational text, ब्रह्मसूत्र, के प्रथम अध्याय का एक अध्ययन है। इसमें मूल ब्रह्मसूत्रों के साथ-साथ किसी महत्त्वपूर्ण भाष्य (संभवतः आदि शंकराचार्य के भाष्य) का अर्थ और ‘प्रदीपिका’ नामक एक टीका या उप-टीका भी शामिल है। ‘प्रदीपिका’ का अर्थ है ‘प्रकाशित करने वाला दीपक’, जो यह दर्शाता है कि यह टीका भाष्य के गूढ़ अर्थों को और अधिक स्पष्ट करने का कार्य करती है। प्रथम अध्याय, ‘समन्वयाध्याय’, मुख्य रूप से यह स्थापित करता है कि सभी उपनिषदों का सुसंगत तात्पर्य अद्वैत ब्रह्म ही है। यह वेदांत के गंभीर छात्रों के लिए एक महत्त्वपूर्ण कृति है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।