इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक शोध-प्रबंध (Thesis) है, जो 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच के हिंदी साहित्य (जैसे- रासो काव्य, सिद्ध-नाथ साहित्य) का विश्लेषण कर उस दौर के उत्तर भारतीय समाज की रूपरेखा प्रस्तुत करता है। इस कृति में तत्कालीन सामाजिक संरचना, रीति-रिवाज, धार्मिक विश्वासों, और राजनीतिक उथल-पुथल का साहित्यिक स्रोतों के आधार पर अध्ययन किया गया है। यह हिंदी साहित्य और मध्यकालीन भारतीय इतिहास के शोधकर्ताओं के लिए एक विशिष्ट और गहन अकादमिक कार्य है।
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