इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानन्द सरस्वती की प्रकांड विद्वत्ता और उनके शास्त्रीय ज्ञान पर केंद्रित है। इसमें लेखक ने प्रमाणों के आधार पर यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि स्वामी दयानन्द वेदों, व्याकरण, दर्शन और अन्य शास्त्रों के एक अद्वितीय विद्वान थे। यह कृति उन आरोपों का खंडन करती है जो उनकी विद्वत्ता पर सवाल उठाते हैं। यह आर्य समाज के अनुयायियों और स्वामी दयानन्द के जीवन-दर्शन में रुचि रखने वालों के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।
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