इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह संभवतः महात्मा गांधी के लेखों और भाषणों के संग्रह का पाँचवाँ खंड है, जो ‘धर्म और नीति’ के विषय पर केंद्रित है। गांधीजी के लिए धर्म और राजनीति अविभाज्य थे, और उनकी राजनीति गहरे नैतिक और धार्मिक सिद्धांतों पर आधारित थी। इस खंड में सत्य, अहिंसा, सर्वोदय, और ईश्वर में उनकी आस्था जैसे विषयों पर उनके विचार संकलित हो सकते हैं, जो दिखाते हैं कि कैसे उन्होंने नैतिक सिद्धांतों को सामाजिक और राजनीतिक कार्रवाई का आधार बनाया।
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