इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह दिगंबर जैन आचार्य मल्लवादी द्वारा रचित एक अत्यंत गहन और विशाल दार्शनिक ग्रंथ ‘द्वादशारनयचक्र’ का तीसरा भाग है। ‘बारह अरों वाले नय का चक्र’ नामक इस ग्रंथ में बारह अलग-अलग दार्शनिक दृष्टिकोणों (नयों) को एक चक्र की तीलियों के रूप में व्यवस्थित किया गया है और प्रत्येक की विस्तृत समीक्षा की गई है। यह अनेकांतवाद के सिद्धांत को स्थापित करने के लिए भारतीय दर्शन के सभी प्रमुख मतों का एक विश्वकोशीय और आलोचनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। यह भारतीय दर्शन का एक शिखर ग्रंथ है।
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