इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह श्रीमद्भगवद्गीता पर लिखा गया एक ‘आर्य भाष्य’ है, जिसका नाम ‘योग प्रदीप’ है। ‘प्रदीप’ का अर्थ है दीपक, यह भाष्य गीता के योग-मार्ग पर प्रकाश डालता है। ‘आर्य’ शब्द यह संकेत दे सकता है कि यह आर्य समाज के सिद्धांतों के अनुसार की गई व्याख्या है, जिसमें वैदिक परिप्रेक्ष्य और तर्क पर विशेष जोर दिया गया हो। यह गीता को एक सार्वभौमिक योगशास्त्र के रूप में प्रस्तुत करती है, जो पाठकों को कर्म, भक्ति और ज्ञान के योग द्वारा आत्म-साक्षात्कार का मार्ग दिखाती है।
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