इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक साहित्यिक आलोचना की पुस्तक है जो हिंदी के रीतिकाल की रीतिमुक्त काव्यधारा के प्रमुख कवि ‘घनानंद’ के जीवन और उनकी कविता पर केंद्रित है। घनानंद को ‘प्रेम की पीर’ के कवि के रूप में जाना जाता है। इस पुस्तक में उनकी कविता में व्यक्त प्रेम, विरह, और मार्मिक भावनाओं का गहन विश्लेषण किया गया है। यह उनकी अनूठी काव्य शैली, उनकी लाक्षणिक भाषा और फारसी के प्रभाव को समझने का प्रयास करती है, जिसने उन्हें अपने समय के अन्य कवियों से अलग बनाया।
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