इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“गुप्ता सार संग्रह” शीर्षक से प्रतीत होता है कि यह गुप्त साम्राज्य के इतिहास का एक सार-संग्रह है। गुप्त काल को भारतीय इतिहास का ‘स्वर्ण युग’ माना जाता है, क्योंकि इस दौरान कला, साहित्य, विज्ञान, और दर्शन के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई। इस पुस्तक में चंद्रगुप्त प्रथम से लेकर स्कंदगुप्त तक के प्रमुख शासकों, उनकी विजयों, उनके शासन-प्रबंध, और उस युग की सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक उपलब्धियों का संक्षिप्त लेकिन جامع (comprehensive) विवरण दिया गया होगा। इसमें कालिदास जैसे महान कवियों, आर्यभट्ट जैसे वैज्ञानिकों और उस समय की मूर्तिकला तथा वास्तुकला की भी चर्चा हो सकती है। यह इतिहास के विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी संक्षिप्त गाइडबुक है।
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