इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक हिंदी ‘काव्यशास्त्र’ या ‘साहित्यशास्त्र’ के ऐतिहासिक विकास का एक विस्तृत और प्रामाणिक अध्ययन है। इसमें रीतिकाल के आचार्य कवियों (जैसे- केशव, चिंतामणि) से लेकर आधुनिक काल के आलोचकों तक काव्य के विभिन्न सिद्धांतों – जैसे रस, अलंकार, ध्वनि, और छंद – के विकास और उनकी व्याख्या का क्रमबद्ध विवेचन है। यह हिंदी साहित्य के उच्च-स्तरीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक अनिवार्य और मानक ग्रंथ है।
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