इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक हिंदू धर्म के विभिन्न सिद्धांतों, मान्यताओं, और परंपराओं की एक ‘मीमांसा’ यानी गहन और आलोचनात्मक विवेचना प्रस्तुत करती है। यह केवल एक परिचयात्मक ग्रंथ नहीं, बल्कि एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है। इसमें लेखक ने हिंदू धर्म के दार्शनिक आधार (जैसे- कर्म, पुनर्जन्म, मोक्ष), इसके सामाजिक स्वरूप (जैसे- वर्ण-व्यवस्था, आश्रम-व्यवस्था), और इसकी विभिन्न उपासना-पद्धतियों का तार्किक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया होगा। इसका उद्देश्य अंधश्रद्धा से परे जाकर हिंदू धर्म के शाश्वत तत्वों और समय के साथ आए बदलावों को समझना है। यह धर्म के जिज्ञासु और गंभीर अध्येताओं के लिए एक विचारोत्तेजक कृति है।
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