इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“हिन्दुत्व” शीर्षक वाली यह पुस्तक संभवतः उस वैचारिक और राजनीतिक अवधारणा की पड़ताल करती है जिसे विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी 1923 की पुस्तक “हिन्दुत्व: हू इज अ हिन्दू?” में प्रतिपादित किया था। यह कृति ‘हिन्दू धर्म’ (एक धार्मिक प्रणाली) और ‘हिन्दुत्व’ (एक सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान) के बीच अंतर स्पष्ट कर सकती है। इसमें तर्क दिया जा सकता है कि हिन्दुत्व एक साझा भूगोल (सिंधु नदी से समुद्र तक), साझा रक्त (जाति), और साझा संस्कृति (संस्कृति) पर आधारित एक राष्ट्रीय पहचान है। यह पुस्तक इस विचारधारा के ऐतिहासिक विकास, इसके प्रमुख सिद्धांतों और समकालीन भारतीय राजनीति तथा समाज पर इसके प्रभाव का विश्लेषण कर सकती है।
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