इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
शिवचरन लाल शर्मा द्वारा लिखित यह पुस्तक उस काल का वर्णन करती है जब भारत में अंग्रेजों का शासन स्थापित नहीं हुआ था। यह संभवतः 18वीं सदी के भारत की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति का एक ऐतिहासिक चित्रण प्रस्तुत करती है। इसमें मुगल साम्राज्य के पतन, मराठों, सिखों और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के उदय, और यूरोपीय कंपनियों के आगमन की कहानी हो सकती है। यह कृति पाठकों को यह समझने में मदद करती है कि ब्रिटिश शासन से पहले भारत कैसा था और किन परिस्थितियों के कारण भारत पर विदेशी शासन स्थापित हुआ।
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