इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह महर्षि जैमिनि द्वारा रचित ‘मीमांसा सूत्रों’ पर एक ‘वृत्ति’ अर्थात संक्षिप्त टीका या व्याख्या है। मीमांसा दर्शन, छः आस्तिक दर्शनों में से एक है, जो मुख्य रूप से वेदों के कर्मकांडीय भाग की व्याख्या के नियमों से संबंधित है। यह वृत्ति जैमिनि के गूढ़ और संक्षिप्त सूत्रों के अर्थ को स्पष्ट करती है, जिससे पाठक वैदिक यज्ञों और अनुष्ठानों के पीछे के तार्किक और दार्शनिक आधार को समझ सकें।
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