इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन दर्शन के ‘स्वरूप’ का एक समग्र परिचय और उसका ‘विश्लेषण’ प्रस्तुत करती है। इसमें जैन दर्शन के प्रमुख सिद्धांतों जैसे- द्रव्य, तत्व, अनेकांतवाद, स्याद्वाद, और कर्म-सिद्धांत की सरल और स्पष्ट व्याख्या की गई है। लेखक ने केवल सिद्धांतों का वर्णन नहीं किया, बल्कि उनकी तार्किक सुसंगतता और अन्य दर्शनों के साथ उनका तुलनात्मक विश्लेषण भी किया है। यह जैन दर्शन को एक व्यवस्थित और तार्किक रूप में समझने के लिए एक उत्कृष्ट कृति है।
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