इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह ग्रंथ जयपुर शहर और वहाँ के आराध्य देव, श्री गोविंद देव जी, की महिमा और वैभव का एक विस्तृत वर्णन प्रस्तुत करता है। यह उस श्रृंखला का प्रथम खंड है। “जयपुर वैभवम्” में संभवतः जयपुर के इतिहास, उसकी स्थापना, उसकी अनूठी वास्तुकला (जैसे- हवा महल, जंतर मंतर), और उसकी कला-संस्कृति का गुणगान किया गया होगा। “गोविंद वैभवम्” खंड में श्री गोविंद देव जी के मंदिर के इतिहास, उनकी मूर्ति के महत्व (जो वृंदावन से जयपुर लाई गई थी), और उनसे जुड़ी पूजा-परंपराओं तथा उत्सवों का भक्तिपूर्ण विवरण होगा। यह इतिहास, संस्कृति और भक्ति का एक सुंदर संगम है।
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