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कबीर मन्सूर अर्थात स्वसंवेदार्थप्रकाश: - Kabeer Mansur Arthat Svasamvedarth Prakash - Book
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कबीर मन्सूर अर्थात स्वसंवेदार्थप्रकाश: – Kabeer Mansur Arthat Svasamvedarth Prakash – Book

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पुस्तक सार

यह एक गहरा दार्शनिक और आध्यात्मिक ग्रंथ है जो संत कबीर और सूफी संत मंसूर अल-हल्लाज के विचारों के बीच की समानता और उनके मूल संदेश का विश्लेषण करता है। दोनों ही संतों ने ‘अहं’ को मिटाकर परम सत्ता के साथ एकाकार होने पर जोर दिया (मंसूर का ‘अनल-हक’ और कबीर का ‘लाली मेरे लाल की’)। ‘स्वसंवेदार्थप्रकाश’ का अर्थ है ‘अपने अनुभव से प्राप्त हुए अर्थ का प्रकाश’। यह पुस्तक बताती है कि दोनों की शिक्षाओं का सार बाहरी कर्मकांडों में नहीं, बल्कि आंतरिक अनुभव और आत्म-साक्षात्कार में निहित है। यह हिंदू भक्ति और सूफी रहस्यवाद के बीच के अद्भुत संगम को दर्शाती एक महत्वपूर्ण कृति है।

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