इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“कारिकावली-मुक्तावली” न्याय-वैशेषिक दर्शन को समझने के लिए एक अत्यंत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसकी रचना विश्वनाथ न्यायपंचानन ने की थी। “कारिकावली” में उन्होंने न्याय-वैशेषिक के सात पदार्थों (द्रव्य, गुण, कर्म आदि) और प्रमाणों को सरल और याद करने योग्य ‘कारिकाओं’ (पद्य) में प्रस्तुत किया है। फिर, उन्होंने स्वयं ही इन कारिकाओं पर “मुक्तावली” नामक एक विस्तृत गद्य टीका लिखी है, जिसमें वे प्रत्येक सिद्धांत को स्पष्ट करते हैं और तार्किक विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। यह पुस्तक इस दर्शन में प्रवेश करने वाले छात्रों के लिए एक मानक पाठ्यपुस्तक के रूप में सदियों से प्रयोग की जा रही है।
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