इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘कर्म मीमांसा’ दर्शन पर एक ग्रंथ है, जो संभवतः पूर्व मीमांसा दर्शन का उल्लेख कर रहा है। यह दर्शन वेदों के कर्मकांड भाग पर आधारित है और यज्ञों के अनुष्ठान और उनके फलों की विस्तृत ‘मीमांसा’ (गहन विवेचन) करता है। यह कृति कर्म के सिद्धांत, यज्ञों के महत्व, और वैदिक वाक्यों के सही अर्थ-निर्णय के नियमों पर प्रकाश डालती है। यह भारतीय दर्शन की एक महत्वपूर्ण शाखा का परिचय देती है।
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