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कर्म मीमांसा दर्शनम्‌ - Karm Mimansa Darshanm - Book
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कर्म मीमांसा दर्शनम्‌ – Karm Mimansa Darshanm – Book

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पुस्तक सार

कर्म मीमांसा दर्शनम्’ भारतीय दर्शन के छह प्रमुख स्कूलों में से एक, पूर्व मीमांसा दर्शन पर एक ग्रंथ है। यह दर्शन मुख्य रूप से वेदों के कर्मकांड भाग की व्याख्या और वेदों में वर्णित यज्ञों की प्रामाणिकता को स्थापित करने पर केंद्रित है। यह ‘कर्म’ के सिद्धांत की गहन ‘मीमांसा’ या विश्लेषण करता है, और यह मानता है कि सही विधि से किए गए वैदिक अनुष्ठान अनिवार्य रूप से अपना फल (अपूर्व) उत्पन्न करते हैं। यह पुस्तक जैमिनी के ‘मीमांसा सूत्र’ और उसके भाष्यकारों जैसे शबर, कुमारिल भट्ट और प्रभाकर के विचारों की व्याख्या करती है। यह धर्म और कर्म के स्वरूप को समझने के लिए एक मौलिक दार्शनिक कृति है।

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