इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक भारतीय दर्शन के दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों – ‘कर्मवाद’ (कर्म का सिद्धांत) और ‘जन्मान्तर’ (पुनर्जन्म) – पर एक गहन विवेचन प्रस्तुत करती है। इसमें यह समझाया गया है कि हमारे वर्तमान जीवन के सुख-दुख हमारे पिछले जन्मों के कर्मों का फल कैसे हैं, और हमारे इस जन्म के कर्म हमारे भविष्य के जन्मों को कैसे निर्धारित करेंगे। यह कृति कर्म के अटल नियम और आत्मा की यात्रा को तार्किक और दार्शनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास है।
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