इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
केन उपनिषद’ सामवेद की तलवकार शाखा से संबंधित एक प्रमुख और प्राचीन उपनिषद है। इसका नाम ‘केन’ (किसके द्वारा?) शब्द से शुरू होने के कारण पड़ा है। यह उपनिषद ब्रह्म के स्वरूप पर एक गहन दार्शनिक संवाद प्रस्तुत करता है। इसमें यह प्रश्न उठाया गया है कि वह कौन सी परम सत्ता है जिसकी शक्ति से मन सोचता है, प्राण चलते हैं, और इंद्रियाँ अपने विषयों को ग्रहण करती हैं। यह उपनिषद तर्क और बुद्धि से परे, उस अगोचर और अवर्णनीय ब्रह्म तत्व की ओर संकेत करता है, जिसे केवल आत्म-अनुभूति के माध्यम से ही जाना जा सकता है। यक्ष की प्रसिद्ध कथा के माध्यम से यह देवों के अहंकार को तोड़कर ब्रह्म की सर्वोपरिता को स्थापित करता है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।