इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक हिंदी भाषा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय, ‘खड़ीबोली आंदोलन’ का दस्तावेजीकरण करती है। यह उस साहित्यिक और सामाजिक आंदोलन का वर्णन करती है जिसके परिणामस्वरूप ब्रजभाषा और अवधी जैसी काव्य भाषाओं के स्थान पर खड़ीबोली को गद्य और पद्य दोनों के लिए मानक हिंदी के रूप में स्थापित किया गया। इसमें अयोध्या प्रसाद खत्री, भारतेंदु हरिश्चंद्र और महावीर प्रसाद द्विवेदी जैसे प्रमुख हस्तियों के योगदान पर प्रकाश डाला गया है। यह हिंदी साहित्य और भाषा विज्ञान के छात्रों के लिए एक आवश्यक ऐतिहासिक अध्ययन है।
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