इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक खेतड़ी (राजस्थान) के महाराजा अजीत सिंह और स्वामी विवेकानंद के बीच के गहरे और आत्मीय संबंधों पर प्रकाश डालती है। महाराजा अजीत सिंह, विवेकानंद के शुरुआती शिष्यों और सबसे बड़े समर्थकों में से एक थे। उन्होंने ही स्वामीजी को ‘विवेकानंद’ नाम दिया और उनकी शिकागो यात्रा का पूरा खर्च उठाया। यह कृति एक राजा और एक संन्यासी की अनूठी मित्रता की कहानी है, जिसने भारतीय नवजागरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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