इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक हिंदू पंचांग की एक जटिल ज्योतिषीय और धर्मशास्त्रीय अवधारणा “क्षयमास” की ‘मीमांसा’ अर्थात् गहन विवेचना करती है। क्षयमास एक ऐसी दुर्लभ घटना है जब किसी एक चंद्र मास में दो सूर्य संक्रांतियाँ नहीं होतीं, जिससे वह मास ‘क्षय’ या लुप्त हो जाता है। यह स्थिति लगभग 141 वर्षों में एक बार आती है। इस पुस्तक में क्षयमास की गणना कैसे की जाती है, इसके ज्योतिषीय प्रभाव क्या होते हैं, और इस अवधि में कौन से धार्मिक कृत्य (जैसे- विवाह, यज्ञ) वर्जित हैं और कौन से किए जा सकते हैं, इन सभी विषयों पर धर्मशास्त्रों और ज्योतिष-ग्रंथों के आधार पर विस्तृत विश्लेषण किया गया होगा।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।