इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह कृति ‘लक्ष्मी तंत्र’ नामक एक महत्त्वपूर्ण पाञ्चरात्र वैष्णव ग्रंथ के धार्मिक और दार्शनिक पहलुओं का एक विश्लेषणात्मक अध्ययन है। ‘लक्ष्मी तंत्र’ में देवी लक्ष्मी को केवल विष्णु की पत्नी के रूप में नहीं, बल्कि सर्वोच्च शक्ति और ब्रह्मांड की सक्रिय ऊर्जा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस अध्ययन में संभवतः तंत्र में वर्णित सृष्टि-प्रक्रिया, लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों, उनकी उपासना की विधियों और मोक्ष-प्राप्ति में उनकी भूमिका का गहन विश्लेषण किया गया होगा। यह शक्ति-केंद्रित वैष्णव धर्मशास्त्र को समझने के लिए एक महत्त्वपूर्ण कृति है।
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