इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक मार्मिक और शक्तिशाली आत्मकथात्मक कृति है, जो एक ऐसे व्यक्ति के दृष्टिकोण से लिखी गई है जिसने 1945 में हिरोशिमा पर हुए परमाणु बम हमले की विभीषिका को व्यक्तिगत रूप से अनुभव किया है। पुस्तक में हमले से पहले के शांतिपूर्ण जीवन, बम गिरने के भयानक क्षण, और उसके बाद के विनाश, पीड़ा और उत्तरजीविता के संघर्ष का एक अविस्मरणीय और हृदय-विदारक वर्णन होगा। “मेरा” शब्द इसे एक बहुत ही व्यक्तिगत और मानवीय दस्तावेज़ बनाता है। यह केवल एक ऐतिहासिक घटना का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि युद्ध की क्रूरता और शांति के लिए एक स्थायी अपील है।
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