इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
मीमांसा कोश’ का यह दूसरा भाग, भारतीय दर्शन की छह प्रमुख धाराओं में से एक, मीमांसा दर्शन, का एक विश्वकोशीय ग्रंथ है। यह वैदिक कर्मकांडों, यज्ञों की व्याख्या और उनके दार्शनिक आधारों से संबंधित जटिल अवधारणाओं, शब्दों और सिद्धांतों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करता है। यह कोश शोधकर्ताओं, दार्शनिकों और संस्कृत के विद्वानों के लिए एक अमूल्य संदर्भ स्रोत है, जो मीमांसा शास्त्र के गहन अध्ययन में रुचि रखते हैं। यह भारतीय ज्ञान परंपरा की एक महत्वपूर्ण शाखा को समझने में सहायता करता है।
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