इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक ‘मिथ्यात्व’ (झूठी मान्यता या श्रद्धा) का ‘निषेध’ करती है और ‘सच्ची श्रद्धा’ के स्वरूप को समझाती है। यह एक सुधारवादी जैन ग्रंथ हो सकता है, जो समाज में फैले अंधविश्वासों, लोक-मान्यताओं और आगम-विरुद्ध क्रियाकांडों का खंडन करता है। इसका उद्देश्य श्रावकों को सच्चे देव, शास्त्र, और गुरु में अटूट और तर्कसंगत श्रद्धा रखने के लिए प्रेरित करना है, जो मोक्षमार्ग का पहला कदम है।
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