इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘नानेश वाणी’ श्रृंखला का दसवाँ भाग है, जिसमें आचार्य श्री नानेश के प्रवचन हैं। यह खंड विशेष रूप से ‘समीक्षण ध्यान’ की पद्धति पर केंद्रित है, जिसे एक ‘मनोवैज्ञानिक’ दृष्टिकोण से समझाया गया है। समीक्षण ध्यान आत्म-निरीक्षण की एक विधि है जिसमें व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं का तटस्थ भाव से अवलोकन करता है। यह पुस्तक बताती है कि कैसे यह ध्यान पद्धति तनाव और मानसिक समस्याओं को दूर कर आंतरिक शांति प्राप्त करने का एक वैज्ञानिक तरीका है।
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