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नयचक्रसार - Naychakrasaar - Book
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नयचक्रसार – Naychakrasaar – Book

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पुस्तक विवरण

यह श्रीमद् देवचन्द्रजी महाराज द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण जैन दार्शनिक ग्रंथ है। ‘नयचक्रसार’ का अर्थ है ‘नय के चक्र का सार’। ‘नय’ जैन दर्शन में किसी वस्तु को समझने के विभिन्न दृष्टिकोणों को कहते हैं। यह ग्रंथ जैन दर्शन के अनेकांतवाद के सिद्धांत को समझने के लिए मौलिक है और यह बताता है कि कैसे विभिन्न ‘नय’ या दृष्टिकोणों को समझकर ही हम सत्य का एक समग्र और संतुलित ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। यह जैन न्यायशास्त्र का एक गहन अध्ययन है।

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