इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह दिगंबर जैन आचार्य कुन्दकुन्द द्वारा रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ है। ‘नियमसार’ का अर्थ है ‘नियम का सार’, जहाँ ‘नियम’ का तात्पर्य मोक्ष के सच्चे मार्ग, यानी शुद्ध आत्मा के अनुभव से है। पद्मप्रभ मलधारि देव की टीका के साथ, यह संस्करण ‘नियमसार’ की गहन प्राकृत गाथाओं की विस्तृत व्याख्या करता है, और व्यवहार तथा निश्चय रत्नत्रय के बीच समन्वय स्थापित करते हुए आत्म-साधना का मार्ग प्रशस्त करता है।
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