इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“न्याय बिन्दु” महान बौद्ध दार्शनिक धर्मकीर्ति द्वारा रचित बौद्ध न्याय (तर्कशास्त्र) और प्रमाणमीमांसा का एक संक्षिप्त किन्तु अत्यंत सारगर्भित ग्रंथ है। इस कृति में ज्ञान के स्रोतों (प्रमाण) – प्रत्यक्ष और अनुमान – का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया है। धर्मकीर्ति ने इसमें तर्क की वैधता, सही अनुमान की शर्तों और भ्रांतियों के स्वरूप पर प्रकाश डाला है। अपनी संक्षिप्तता के बावजूद, यह भारतीय तर्कशास्त्र के विकास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। यह पुस्तक बौद्ध दर्शन में ज्ञान और तर्क के सिद्धांतों को समझने के लिए एक मूलभूत कृति है, जिसका प्रभाव न केवल बौद्ध बल्कि अन्य भारतीय दर्शनों पर भी पड़ा।
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